वही क वही … ​

वही क वही … ​

दुनियाकी उल्जनो में फसा

जिंदगी के मोड़ पे हे खड़ा

चल रही थी धड़कन उसकी

पर वो… वही के वही …

जेसे लेगाया पवन उड़ाके महक

पर फूल… वही के वही…

जेसे पंछी छोड़ गए आसाम की और

पर पेड़… वही के वही…

जेसे बारिश चली आई जमीं की और

पर बादल… वही के वही…

जेसे चला मुसाफिर मंजिल की और

पर रास्ते… वही के वही…

जेसे रूह चली स्वर्ग की और

पर खामोशिय… वही के वही…

जेसे छोड़ चली मुझे वो घर के और

पर वो लम्हे… वही के वही…

वही टूटे दिल से निकली एल आवाज़

बनके आसू आई ‘नयन’ के पास

बेहना था उसे ज़ज्बातो के साथ

पर रह गई … वही के वही….

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