Words And Voices: यादो की तलाश

Words And Voices: यादो की तलाश

रिवायत की बेदियाँ
गुंंजे उतने ही,
जितने मज़बूत ये रिशते ।
लीहाझ है अपने ताबिर पे हमें,
अपने वजूद पे नाज़ है।

शाखो की साया तले,
बढ़ते है हम अपने मंजिल पले
हमारा होना एक इनायत है
और हमारी मुक्तलिफ दोस्ती,
फलक और समंदर की निशानी है।

चिराग से धुआ,
नवाझिज़ की भाति
आपकी जि़दगी में मुसलसल का वादा,
इतनी ही है हमारी कामना ।

गूंजती है समय की रफतार,
हसीन वादियाँ मे छूपाती है राज़
कच्चे धागो को बुनकर,
यादो को हमारी ही तलाश है।


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