में केद हु तुममें

में केद हु तुममें

में केद हु तुममें , सब मुझे आज़ाद समझते है

में केद हु तुममें पर सब मुझे आज़ाद समझते है

वो पंछी ही क्या जो हर समे घोंसले में बस्ते है।

 

 

केद होना भी एक कला है

तुममें केद होना भी एक कला है

जो समझ गये वो आज़ाद है

जो ना समझ पाए वो मजबूर।

 

 

में उड़ना भी सीखूँ तो तुम मुझे पुकार लेते हो

में ज़रा उड़ना भी सीखूँ तो तुम मुझे पुकार लेते हो

आ जाती हु तुरंत तुम्हारी इक आवाज़ पे

फिर सोचती हु में उन्न अंधेरी रातों में

वो घोसला ही क्या जिसमें तुम ना हो,

वो ज़िंदगी ही क्या जिसमें हम साथ ना हो।

 

 

देख के फिर भी ऐसा लगता है में किसी और की कभी हो ना सकी, सिर्फ़ मेरा ही हक़ है मुझपे,

दिल मेरा अंदर से रोता है ये जान कर,

में केद हु तुममें, और लोग मुझे आज़ाद समझते है।

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