पिया तेरी याद फिर आई

पिया तेरी याद फिर आई

मेरी आंखो को जब तस्वीर तेरी
फ़िर नज़र आई
झूमते पंछियो की धून
हवा ने जब गुनगुनाई
पिया तेरी याद फिर आई
पिया तेरी याद फिर आई
उल्फ़त के खुदा ने
फिर जो मेरी अर्ज़ी ठुकराई
नीले अम्बर में उमड़ी
फिर से  जब पावन घटा छाई
पिया तेरी याद फिर आई
पिया तेरी याद फिर आई
ये मेरे लव्ज़ है ख्वाबो में
जब हक़ीक़त में, मैं जागूँगा
सुनुंगा ना खुदा की मैं,
बस युही कहता जाऊँगा….
“हक़ीक़त में तू आ भ़ी जा
मेरे ख़्वाबो के हमराही
फ़लक से दूर ऊँची है
मेरी चाहत की गहराई
पिया तेरी याद फिर आई
पिया तेरी याद फिर आई….”