Words And Voices: वो लड़की थी या ख्बाब | Lutalica

Words And Voices: वो लड़की थी या ख्बाब


Words And Voices: वो लड़की थी या ख्बाब | Lutalica
http://www.baaam.se/1990-2

लड़की थी या ख्वाब कहा में जानता था।।
में तो बस उसी के खयालो में जिंदा था।।

कुछ रोज़ पेहले
पास आके कुछ केह गई वो मुझसे।।
मानो नींद में भी वो लिपट गई मुझसे।।

वो सुबह की आज़ान की तराह आती थी।।
खुदा से मेरी ख्वाइश की शिफारिश करती थी।।

ख्वाब होके भी बो हकीकत की मांग करती थी।।
बिन मौसम जैसे बारिश का इंतजार करती थी।।

मुस्कुराके उसका मुझसे रोज़ यू मिलना।।
मानो जैसे चांद से चांदनी को चुराना।।

फिर से रात के ढलने की देर है।।
फिर से ख्वाब में मिलनी देर है।।

लड़की थी या ख्वाब कहा में जानता था।।
में तो बस उसी के खयालो में जिंदा था।।


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